भारत-नेपाल-चीन और कालापानी, विवाद पर ड्रैगन की नजर, क्‍या है नेपाल की सुगौली संधि

नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने कहा है कि उनकी सरकार देशभक्त सरकार है, वह किसी को भी नेपाल की एक इंच जमीन पर कब्जा करने की अनुमति नहीं देगी। ओली ने कहा, वह भारत से कहेंगे कि वह कालापानी से अपने सुरक्षा बल हटाए। हालांकि, भारत ने इस पर अपनी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। ऐसे में सवाल उठाता है कि इस फसाद की जड़ में क्‍या है। क्‍या है कालापानी। इस कालापानी पर क्‍यों है चीन की नजर। इसके साथ यह जानेंगे कि सुगौली संधि क्‍या है। क्‍या है इसके प्रावधान। कालापानी देश का हिस्‍सा, भारत ने क्लियर किया अपना स्‍टैंड 31 अक्टूबर को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के नए केंद्रशासित प्रदेश के रूप में गठन के बाद भारत सरकार ने देश का जो नया नक्शा जारी किया था, उसी के बाद विवाद की स्थिति बनी है। नए नक्शे में कालापानी को भारतीय नक्शे में शामिल किया गया है। इसके साथ पाकिस्‍तान के कब्जे वाले गुलाम कश्मीर को नवगठित केंद्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर का हिस्सा दिखाया गया है, तो गिलगित-बाल्टिस्तान को लद्दाख का हिस्सा दर्शाया गया है। नेपाल सरकार ने छह नवंबर को कालापानी को भारतीय नक्शे में शामिल किए जाने पर आपत्ति जताई थी। प्रधानमंत्री ओली ने कहा है कि नेपाल सरकार किसी को भी अपनी जमीन पर कब्जा नहीं करने देगी। इसलिए भारत सरकार को अपने सुरक्षा बल कालापानी से बुला लेने चाहिए। भारत सरकार ने कहा है कि उसका नक्शा सही और पूर्व स्थितियों पर आधारित है। उसने किसी पड़ोसी की जमीन पर कब्जा नहीं किया है।